गायत्री मंत्र शाप विमोचन विधि



जिस प्रकार शस्त्र के उपयोग हेतु अनुज्ञापत्र (license) लेना आवश्यक होता है और अनुज्ञापत्र (license) भी उसी व्यक्ति को प्राप्त होता है जो व्यक्ति उस शस्त्र के द्वारा आमजन को अकारण हानि न पहुंचाए। ठीक उसी प्रकार से अनेक मंत्रो व स्तोत्रों को कीलित/शापित कर दिया जाता है ताकि मंत्रो के द्वारा कोई गलत कार्य न कर सके एवं उत्कीलन विधि को गुप्त रखा जाता है जो मात्र गुरु के द्वारा ही अपने योग्य शिष्य को दिया जाता है ऐंसा शिष्य जो उस तंत्र मंत्र का गलत प्रयोग न करे।

धार्मिक पुस्तकों मे वर्णित अनेकों मंत्रो को कीलित किया गया है उनमे से एक है “गायत्री मंत्र” । गायत्री मंत्र को जपने के पूर्व उसको शाप मुक्त करना आवश्यक होता है। गायत्री मंत्र ब्रह्मा, वसिष्ठ, विश्वामित्र एवं शुक्र के द्वारा शापित है | गायत्री मंत्र शाप विमोचन विधि नीचे दी गई है एक एक करके आपको चारों मंत्र पढ़ना है। गायत्री मंत्र का गलत प्रयोग होने से रोकने हेतु उसको शापित कर दिया गया है।

ब्रह्मा शाप विमोचन
विनियोगः
ॐ अस्य श्री ब्रह्मशापविमोचनमंत्रस्य ब्रह्माऋषिर्भुक्तिमुक्तिप्रदा ब्रह्मशापविमोचनी गायत्रीशक्तिर्देवता गायत्रीछन्दः ब्रह्मशापविमोचने विनियोगः |
मंत्र-गायत्री ब्रह्मेत्युपासीत यद्रूपं ब्रह्मविदो विदुः |
तां पश्यन्ति धीराः सुमनसो वाचमग्रतः |
ॐ वेदांतनाथाय विद्महे हिरण्यगर्भाय धीमहि तन्नो ब्रह्म प्रचोदयात |
ॐ देवी गायत्रीत्वं ब्रह्मशापाद्विमुक्ता भव |

वसिष्ठ शाप विमोचन
विनियोगः
ॐ अस्य श्री वसिष्ठशापविमोचनमंत्रस्य निग्रहानुग्रहकर्ता वसिष्ठऋषिर्वशिष्टानु गृहीता गायत्री शक्तिर्देवता विश्वोद्भवा गायत्री छन्दः वसिष्ठशाप विमोचनार्थं जपे विनियोगः |
ॐ सोऽहंअर्कमयं ज्योतिरात्मज्योतिरहं शिवः |
आत्मज्योतिरहं शुक्रः सर्वज्योतिरसोस्म्यहं |
(( इस मंत्र को बोलकर फिर योनि मुद्रा दिखाए फिर तीन बार गायत्री मंत्र जपे ))
ॐ देवी गायत्री त्वं | वसिष्ठशापाद्विमुक्ता भव |

विश्वामित्र शाप विमोचन
विनियोगः
ॐ अस्य श्री विश्वमित्राशापविमोचनमंत्रस्य नूतनसृष्टिकर्ता विश्वामित्रऋषिर्विश्वामित्रानुगृहिता गायत्री शक्तिर्देवता वाग्देहा गायत्री छन्दः विश्वामित्रशापविमोचनार्थं जपे विनियोगः |
ॐ गायत्रीं भजाम्यग्नीमुखीं विश्वगर्भां समुद्भवाः |
देवाश्चक्रिरे विश्वसृष्टिं तां कल्याणीमिष्टकरीं प्रपद्ये |
ॐ देवि गायत्री त्वं विश्वामित्रशापाद्विमुक्ता भव |

शुक्र शाप विमोचन
विनियोगः
ॐ अस्य श्री शुक्रशापविमोचन मंत्रस्य श्री शुक्र ऋषिः अनुष्टुप्छन्दः देवी गायत्री देवता शुक्रशापविमोचनार्थे जपे विनियोगः |
सोऽहंअर्कमयं ज्योतिरर्क ज्योतिरहंशिवः |
आत्मज्योतिरहं शुक्रः सर्वज्योतिरसोस्म्यहं |
ॐ देवी गायत्री त्वं शुक्रशापाद्विमुक्ता भव |

उपरोक्त मंत्र पढ़ने के बाद फिर सभी से एक साथ प्रार्थना करें।
ॐ अहो देवि महादेवि संध्ये विद्ये सरस्वति |
अजरे अमरे चैव ब्रह्मयोनिर्नमोस्तु ते |
ॐ देवी गायत्री त्वं ब्रह्मशापाद्विमुक्ता भव, वसिष्ठशापाद्विमुक्ताभव, विश्वामित्रशापाद्विमुक्ता भव, शुक्रशापाद्विमुक्ता भव |

गायत्री मंत्र:- “ॐ भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि। धियो यो न: प्रचोदयात्”

इस विधि से गायत्री मंत्र शाप विमोचन करके मंत्र का जाप करें।


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